अंतराष्‍ट्रीय वरिष्‍ठजन दिवस पर भाषण । International elders day speech in hindi



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1 अक्‍टूबर में पूरे विश्‍व में अंतर्राष्‍ट्रीय वरिष्‍ठ नागरिक
दिवस मानाया जाता हैं। हमें वृद्ध जन के हित में कार्य करना चाहिए। उन्‍हें उत्‍साह
एवं उनके अनुभव का उपयोग करना चाहिए। उन्‍हें हमेशा सम्‍मान कर उनको उनकी सही जगह सही
लाभ देने में मदद करना चाहिए। 

  ’’अभिवादनशीलस्य  नित्यम्वृद्धोपसेविनः।

    चत्वारि तस्य वर्धन्ते
आयुर्विद्या यशोबलम्।।
’’

जो लोग अभिवादनशील हैं तथा नित्य वृद्धों की सेवा करने वाले हैं उनकी
चार चीजें स्वतः बढ़ती हैं
आयु (उम्र)विद्यायश तथा बल।

अतः हम सभी को अपने वृद्धोजनों की सेवा व सम्मान करना चाहिएक्योंकि वृद्धावस्था
प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में आती है। सभी को इस स्थिति से होकर गुजरना पड़ता है।
यह जीवन की शाश्वत अवस्था है
जब व्यक्ति 60 वर्ष की अवस्था को पार करता है तथा वह इस अवस्था में
प्रवेश करता है
तो व्यक्ति के जीवन में कई
शारीरिक
मानसिकआर्थिकपारिवारिक परिवर्तन
परिलक्षित होते हैं
जिसके कारण समाज एवं परिवार में उनके प्रति दृष्टिकोण में परिवर्तन
हो जाता है।

60 वर्ष एवं उसके अधिक आयु के व्यक्तियों को वरिष्ठ नागरिक के रूप
में परिभाषित किया गया है।

प्रत्येक मनुष्य का जीवन बाल्यावस्थाकिशोरावस्थायुवावस्थाप्रौढ़ावस्था से होता हुआ वृद्धावस्था में प्रवेश
करता है। इस अवस्था में व्यक्ति अपने शारीरिक
मानसिकसामाजिक तथा बौद्धिक स्तर पर शिथिल पड़ जाता है।
उसके शरीर की क्रियाऐं धीमी हो जाती है अर्थात् उसके रक्त संचार
मल मूत्र्ा बर्हिगमन एवं
पाचनशक्ति आदि की क्रियाएँ अशक्त हो जाती है। इस अवस्था में प्रजनन की क्षमता भी
लगभग समाप्त हो जाती है। वृद्ध जिद्द और मानसिक प्रतिरक्षाओं के प्रयोग की ओर झुक
जाता है। उसमें सुरक्षा एवं आत्मविश्वास की भावना धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है।
इन सब कारणों से वह आर्थिक क्रिया-कलापों में अक्षम हो जाता है। इस प्रकार
आर्थोपार्जन के लिए वरिष्ठजन अपेक्षित शक्ति के अभाव में निरन्तर आर्थिक समस्याओं
का शिकार हो जाते है। वृद्धों की अनेक प्रकार की व्यक्तिगत अक्षमताएँ सामाजिक
क्षेत्र में उन्हें अनुत्साही तथा हीन दशा में पहुँचा देती हैं जिससे वह स्वयं को
उपेक्षित महसूस करते है।
 

हमें वृद्धों को मदद करना तथा उन्हें सशक्त बनाना है। इस से व सभी
वृद्ध जो समाज से स्वयं घर अपेक्षित हैं
उनको अपनी एक नयी पहचान बनाने में मदद मिलती है।
वृद्धावस्था में आय के सभी साधन बन्द हो जाते हैं
लेकिन खर्च उसी मात्रा में रहता है जिसके कारण वह
घर से अपेक्षा करते हैं और घर के सदस्य उनके जरूरतों को अनदेखा करते हैं। यही कारण
है कि वृद्धों में असहाय की भावना उत्पन्न होती है
उस समय हमें वृद्धों की मदद करता है। वृद्धों को
आपस में मिल-जुल कार्य करने से उन्हें अकेलेपन का भी एहसास नहीं होता और वह अपने
दैनिक खर्च को भी स्वयं वहन करते हैं। जिससे परिवार में भी उनका सम्मान बढ़ता है।
इस प्रकार अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर  हमारा प्रमुख लक्ष्य वृद्धों को
सशक्त बनाना तथा समाज व परिवार में सम्मान दिलाना है।

वरिष्‍ठजनों को सशस्‍त कैंसें करें

वरिष्ठजनों के लिए आर्थिक मदद हेतु वृद्धा पेंशन में वृद्धि करना
आवश्यक हैं क्योंकि वर्तमान समय में इतना कम राशि में खर्च चला पाना कठिन है।
 वरिष्ठजनों के लिए आर्थिक
रूप से सशक्त बनाने के लिए सरकार व गैर सरकारी संस्था को आपस में मिलकर योजना
बनाना चाहिए।
वरिष्ठजनों के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना का प्रावधान होना चाहिए
क्योंकि सबसे ज्यादा स्वास्थ्य बीमा की आवश्यकता वृद्धावस्था में होती है।और अधिक से
अधिक वरिष्ठजनों को सशक्त बना सके।वरिष्ठजनों के लिए विशेष हास्पिटल की व्यवस्था होनी चाहिए जिससे उनका
उपचार तत्काल हो सके।वृद्धजनों के सुरक्षा के लिए विशेष कानून होना चाहिए जिससे उनको
न्यूनतम समय में न्याय मिल सके।वृद्धजनों को सशक्त बनाने के लिए कम ब्याज दर पर सभी बैंकिग द्वारा
सरलता से लोन लेने का प्रावधान होना चाहिए।

वरिष्ठजनों के लिए कुछ प्रतिशत सभी स्थानों पर आरक्षण का प्रावधान
होना चाहिए जिससे उनकी सक्रियता बनी रहे।

वरिष्ठजनों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए सरकार द्वारा मुक्त चिकित्सा
का प्रावधान होना चाहिए और सभी प्रकार के दवाईयों पर विशेष छूट का भी प्रावधान
होना चाहिए।
वरिष्ठजनों को पारिवारिक व सामाजिक हिंसा से बचाने के लिए कठोर कानून
की आवश्यकता है जिससे कोई भी व्यक्ति वृद्धों के साथ दुर्व्यवहार न कर सके।अध्ययन में ऐसे वरिष्ठजनों का अध्ययन किया गया है जो कार्यशील है
अर्थात् उन वृद्धों पर प्रकाश नहीं डाला गया है
जो शारीरिक रूप से असशक्त हैं।शारीरिक रूप से सशक्त वृद्धों के लिए केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार
को आर्थिक दृष्टि से सशक्त बनाने के लिए योजना बनाना चाहिए।वरिष्ठजनों की जनसंख्या में निरंतर वृद्धि को देखते हुए सरकार को
शक्त एवं कठोर कानून बनाना चाहिए
जिससे परिवार के वृद्धों कोपरिवार के अन्य सभी सदस्यों द्वारा सम्मान पूर्वक
रखना अनिवार्य होनी चाहिए।
भविष्य में उन वृद्धों को ध्यान में रखकर शोध करने की आवश्यकता है जो
कि उम्र के अंतिम पड़ाव पर है एवं पूर्णतः दूसरे पर आश्रित है। 

 

वर्तमान वैश्वीकरण समाज में वृद्धों की स्थिति बहुत दयनीय हो गयी है।
वृद्धों की जनसंख्या निरंतर बढ़ रही है जिससे उनकी समस्याओं में भी वृद्धि हो रही
है । 60 वर्ष के बाद व्यक्ति वृद्धावस्था में प्रवेश कर जाता
  है जिसके कारण उसे सामाजिक
पारिवारिक
आर्थिक एवं स्वास्थ्य
सम्बंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस प्रकार चयनित क्षेत्र में प्रस्तुत
अध्ययन के द्वारा यह ज्ञात हुआ है कि वृद्धजनों के समक्ष विभिन्न समस्या है
जिसमें वर्तमान समय में
वृद्धजनों का ज्यादातर कम पढ़ा-लिखा होना तथा उनके मानसिक स्थिति का निरन्तर परिवर्तन
होना प्रमुख है और कुछ ऐसे वरिष्ठ जन हैं उनको की उनके लिए कल्याणार्थ द्वारा
चलाये गये कार्यक्रमों का ज्ञान भी नहीं है। वर्तमान समय में पारिवारिक एवं
सामाजिक समस्या के निरंतर बढ़ने के कारण वृद्धों का वृद्धा आश्रम की तरफ रूख करते
जा रहे हैं क्योंकि वह स्वयं को समाज एवं परिवार से उपेक्षित एवं अकेला महसूस करते
हैं।

By Admin